logo

हरियाणा में सड़ गया 45 हजार टन गेहूं, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दर्ज होगी FIR, जांच कमेटी गठित

45 thousand tonnes of wheat rotten in Haryana, FIR will be registered against responsible officials, inquiry committee constituted

 
45 thousand tonnes of wheat rotten in Haryana, FIR will be registered against responsible officials, inquiry committee constituted

Mhara Hariyana News:

हरियाणा की सरकारी मंडियों में करीब 45 हजार टन गेहूं सड़ जाने के बाद अब सरकार एक्शन में आ गई है. उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्ती दिखाई है. इसके बाद आनन- फानन में मामले की जांच करने के लिए प्रशासनिक सचिवों के नेतृत्व में एक कमेटी गठित कर दी गई. ये कमेटी जांच करने के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.


डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के चलते कैथल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में गेहूं खुले आसमान के नीचे रहने की वजह से सड़ गया. उनकी मानें तो देखरेख के अभाव के कारण करीब 44 हजार 800 टन गेहूं खराब हो चुका है. ऐसे में इसकी जांच के लिए प्रशासनिक सचिवों की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया गया है. इस कमेटी में सीनियर आईएएस और अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि 30 दिन के अंदर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रिपोर्ट पेश करेंगे. साथ ही हर जिले के नोडल अधिकारियों को इस जांच में सहयोग करना होगा.

करीब 45 करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान है

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही नुकसान की भरपाई भी की जाएगी. डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार खराब गेहूं का ऑक्शन कराएगी. इससे करीब 45 करोड़ रूपये आवे का अनुमान है. बाकी बची हुई राशि दोषी अधिकारियों से रिकवर कराई जाएगी. दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इस पूरे मामले पर सरकार लगातार नजर रख रही है.

मंत्रियों पर कार्रवाई करनी चाहिए


वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी खराब हुए गेहूं को लेकर प्रदेश सरकार पर हमला बोल दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए विभाग के मंत्रियों पर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे ज्यादा विभागीय मंत्री ही जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि यहां पर सरकार अपने मंत्रियों को बचाने की कोशिश कर रही है. यही वजह है कि उसने छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए जांच कनेटी गठित कर दी.