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Project Cheetah: कूनो नेशनल पार्क में लोगों को कब होंगे चीतों के दीदार, जाने ​​​​​​​
नामीबिया से 8 चीते ग्वालियर एयरबेस पर लैंड कर चुकी है अब से कुछ देर बाद पीएम मोदी कूनो नेशनल पार्क में बनाए गए क्वारंटीन बाड़े में छोड़ेंगे
 
कूनो नेशनल पार्क में लोगों को कब होंगे चीतों के दीदार

Mhara Hariyana News

सात दशक बाद देश में आज से एक बार फिर चीता (Cheetah) युग की शुरुआत होने जा रहा है. नामीबिया (Namibia) से 8 चीते ग्वालियर एयरबेस (Gwalior Airbase) पर लैंड कर चुकी है. नामीबिया से आए 8 चीतों में तीन नर और पांच मादा तेंदुए शामिल हैं. एयरपोर्ट पर सबसे पहले पशु चिकित्सक चीतों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे.

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में बनाए गए क्वारंटीन बाड़े में छोड़ेंगे. बता दें, साल 1952 में भारत की सरकार ने चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया था. वहीं, आज 72 साल बाद चीतों की एक बार फिर भारत में वापसी हुई है. 

चीतों को लेकर बड़ी बातें...

  •  नामीबिया से लाए जा रहे 8 चीतों में 5 मादा हैं जबकि 3 नर चीता हैं. मादा चीतों की उम्र 2 से 5 साल के बीच है जबकि नर चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच है. इन चीतों को एक महीने तक क्वरंटीन पीरियड में ऱखा जाएगा और इस दौरान 2-3 दिन में इन्हें खाने के लिए 2-3 किलो मीट दिया जाएगा. 
  •  हिंदुस्तान में 70 साल पहले ही चीता को विलुप्त घोषित कर दिया गया था. 70 साल से देश में चीते नहीं थे और ऐसा नहीं है कि अचानक चीतों को लाया जा रहा है. 50 साल पहले चीतों को भारत लाने की कोशिश शुरू हुई थी जो मोदी के जन्मदिन के दिन अपने अंजाम तक पहुंची.
  •  चीतों के लिए मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक हेलीपैड भी बनाया गया. जहां पर चीतों को स्पेशल आर्मी के हेलिकॉप्टर से लाया जाएगा. पीएम मोदी आज 8 चीतों को पिंजरे से उनके बाड़े में छोड़ेंगे. 
  •  तमाम चीतों के गले में एक सैटेलाइटज-वीएचएफ रेडियो कॉलर आईडी मौजूद है जिसकी मदद से भविष्य में उनकी मॉनिटरिंग से लेकर संक्रमण तक ट्रैक करने में मदद मिलेगी. चीतों में किसी तरह का कोई संक्रमण न हो इसके लिए गांवों के अन्य  मवेशियों का भी टीकाकरण किया गया है.
  •  चीतों के लिए 25 वर्ग किलोमीटर का एक विशेष घेरा बनाया गया है. दक्षिण अफ्रीका की सरकार और वन्यजीव विशेषज्ञ इन पर नजर रखेंगे. चीतों को भारतीय मौसम से लेकर यहां के माहौल में ढलने में एक से तीन महीने का वक्त लग सकता है.
  • साउथ अफ्रीका के नामीबिया से चीते इसलिए लाए गए क्योंकि वहां दिन और रात की लंबाई ठीक वैसी ही होती है जैसी कि हिंदुस्तान में है और यहां का तापमान भी अफ्रीका से मिलता जुलता है. मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक रहता है जबकि न्यूनतम तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है जो चीतों के लिए मुफीद है. 
  • विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर बसा मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एमपी के श्योपुर और मुरैना जिले में पड़ता है. 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था. 
  •  चीतों के लिए एमपी के कूनो नेशनल पार्क को ही क्यों चुना गया? 748 वर्ग किलोमीटर में फैला कूनो नेशनल पार्क को 10 जगहों के सर्वे के बाद फाइनल किया गया है. एमपी में पुनर्वास का रिकॉर्ड सबसे अच्छा रहा है. 
  •  चीतों को अच्छे शिकार की जरूरत होती है और कूनो नेशनल पार्क में छोटे हिरण और सुअर की घनी आबादी मौजूद है और पूरे पार्क में चीतल, सांबर और नीलगाय की संख्या करीब 25 हजार है. यानि चीतों को खाने की कोई कमी नहीं होगी. 
  • चीता हफ्ते में एक बार ही शिकार करता है और इसी से उसका काम चल जाता है. चीता एक बार में 7 से 8 किलो मटन खाता है. ऐसा माना जाता है कि चीता अपने शिकार को छोड़कर नहीं जाता है.
  •  चीता ज्यादा ताकतवर माना जाता है और इसीलिए उसके शिकार में किसी की हिस्सेदारी नहीं होती. चीते को एक महीने में चार और साल में 50 जानवर चाहिए होते हैं. शिकार के अलावा चीतों को पानी की जरूरत होती है. 
  • चीते को पर्याप्त जगह चाहिए क्योंकि वो 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन पर सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है जो सिर्फ 3 सेकेंड के भीतर 97 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार पकड़ लेता है.
  •  चीता अगर पूरी ताकत से दौड़े तो 7 मीटर लंबी छलांग लगा सकता है. चीता बिल्ली की प्रजाति का एक जानवर है लेकिन चीता शेर और बाघ की तरह दहाड़ नहीं सकता बल्कि बिल्ली की तरह गुर्राता है.
  • चीतों के विलुप्त होने से भारतीय ग्रासलैंड की इकोलॉजी खराब हुई थी जिसे ठीक करना जरूरी है.17 सितंबर को चीतों के आगमन के बाद बिगड़ी हुई इकोलॉजी के ठीक होने की शुरुआत हो जाएगी.
  • चीते को भारत में आखिरी बार 1948 में देखा गया था. 1952 में यानि 70 साल पहले भारत सरकार ने चीते को विलुप्त घोषित कर दिया था और फिर 1979 से चीतों को भारत में बसाने की प्रक्रिया शुरु की गई थी.
  •  भारत के अलग-अलग राज्यों के जंगल चीतों के घर थे लेकिन पालने और शिकार करने की वजह से देश में चीतों की संख्या धीरे-धीरे घटने लगी थी. 
  •  साल 1947 में सरगुजा के राजा रामानुज प्रताप सिंह ने 3 चीतों का शिकार किया था. माना जाता है ये ही भारत के आखिरी 3 चीते थे. 
  • 2010 में इसके लिए भारत सरकार ने नामीबिया से बातचीत शुरू की लेकिन नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते लाने का समझौता जुलाई 2022 में हुआ इसी समझौते के पहली कड़ी में अब 8 चीते भारत पहुंच रहे हैं.
  •  ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई मांसाहारी जानवर एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में भेजा रहा है.  
  •  कूनो नेशनल पार्क की जमीन पर 17 सितंबर को अफ्रीका से चीतों के लैंड करते ही यहां के जंगल का ईको सिस्टम बदल जाएगा. यहां रहने वाले तेंदुए अपनी कैट प्रजाति के एक नए वन्यप्राणी से पहली बार मुखातिब होंगे. बिल्कुल उनकी जैसी शक्ल वाले ये चीते 70 साल बाद उनके इलाके में आए हैं.