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उत्तराखंड में बंद हुए बद्रीनाथ मंदिर के कपाट, चार धाम यात्रा का भी हुआ समापन

Doors of Badrinath temple closed in Uttarakhand, Char Dham Yatra also ends

 
Doors of Badrinath temple closed in Uttarakhand, Char Dham Yatra also ends

Mhara Hariyana News:

शीतकाल के लिए उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट शनिवार को बंद किए गए. इसी के साथ चार धाम यात्रा का भी समापन हो गया. बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद करने के दौरान हुए रंगारंग समारोह में शिरकत के लिए पांच हजार से अधिक श्रद्धालु यहां जुटे. भगवान विष्णु को समर्पित बद्रीनाथ मंदिर के कपाट जय बद्री विशाल के जयकारों और गढ़वाल स्काउट्स द्वारा बजाई गई भक्ति धुनों के बीच बंद कर दिए गए.


मंदिर के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदिरी ने परंपरा के अनुसार, एक महिला की तरह वस्त्र धारण किए और गर्भगृह के अंदर देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए. बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही इस साल की चार धाम यात्रा समाप्त हो गई. इस साल 61 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने यात्रा की और पिछले सभी रिकॉर्ड टूट गए.

17 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे बद्रीनाथ धाम
इस वर्ष कुल 17 लाख 65 हजार 649 तीर्थयात्री बद्रीनाथ पहुंचे और यह भी एक रिकॉर्ड है. चार धाम यात्रा में शामिल केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों को पिछले महीने बंद कर दिया गया था. दो साल के अंतराल के बाद इस साल चार धाम यात्रा बिना कोविड प्रोटोकॉल के हुई. बता दें, उत्तराखंड के चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम पर हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. पहाड़ों पर बने इस धाम को हर वर्ष छह महीने भक्तों के लिए खोला और छह महीने बंद रखा जाता है.

कपाट बंद करते समय अपनाई जाती है ये खास प्रक्रिया
बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद करने में करीब 5 दिन का समय लगता है. यानी जिस दिन कपाट बंद होते हैं, इसके 5 दिन पहले से ही ये प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसमें सबसे पहले भगवान गणेश के कपाट को बंद किया जाता है. इसके बाद खड़ग पुस्तक की पूजा की जाती है, जबकि इसके बाद मां लक्ष्मी का आह्वान होता है. इस आह्वान में मां लक्ष्मी जी से विनती की जाती है कि वे भगवान विष्णु के साथ इस स्थान पर बिराजें. इन सब के बाद आखिर में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद किए जाते हैं.