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तेज ठंड के कारण बढ़ गई बिजली की मांग, गीजर और हीटर ने बढ़ाई मीटर की रफ्तार

Electricity demand increased due to severe cold, geyser and heater increased meter speed

 
तेज ठंड के कारण बढ़ गई बिजली की मांग, गीजर और हीटर ने बढ़ाई मीटर की रफ्तार


Electricity Demand Increased : देश के कई इलाकों में इस बार की तेज ठंड ने बिजली की खपत बढ़ा दी है. क्योंकि इस बार ठंड के बचने के लिए लोग रूम हीटर, गीजर, वाटर हीटर आदि का इस्तेमाल काफी ज्यादा बढ़ गया है. जिससे देश के कई इलाकों में बिजली की मांग बढ़ गई है. बिजली की मांग सबसे ज्यादा देश के राजधानी दिल्ली और नोएडा में बढ़ी है. क्योंकि यहां पर सबसे ज्यादा लोग रहते हैं. जनवरी माह में लगातार गिरते तापमान के कारण ठंड दिन न व दिन बढ़ती जा रही है. जिससे लोग अपने घरों में रूम हीटर, गीजर, वाटर हीटर का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं. ताकि वह कंपकपाती ठंड से बच सकें. गीजर और हीटर के इस्तेमाल से लोगों के मीटरों की रफ्तार भी बढ़ गई है.


बता दें कि राजधानी दिल्ली में कंपकपाती ठंड बढ़ने के साथ बिजली की अधिकतम मांग दो साल के उच्चस्तर 5,247 मेगावॉट पर पहुंच गई. इस बीच दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर डीडीएल) तथा बीएसईएस दोनों ने बयान में अधिकतम मांग को पूरा करने का दावा किया है. दिल्ली लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, शहर में सुबह 10.56 मिनट पर बिजली की अधिकतम मांग 5,247 मेगावॉट पहुंच गई.

सर्दी के मौसम में सबसे अधिक मांग
वितरण कंपनियों के अनुसार यह मांग न केवल दो साल में जनवरी महीने में सर्वाधिक है बल्कि इस सर्दी के सीजन में भी अब तक की सबसे अधिक मांग है. वर्ष 2022 के जनवरी महीने में बिजली की अधिकतम मांग 5,104 मेगावॉट और 2021 में 5,021 मेगावॉट थी. हालांकि, 2020 में यह 5,343 मेगावॉट थी. उत्तरी दिल्ली में बिजली वितरण कर रही टाटा पावर डीडीएल के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि उसके क्षेत्र में बिजली की मांग रिकॉर्ड 1,646 मेगावॉट रही. इस मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया गया.

अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था
प्रवक्ता का कहना है कि वह अपने ग्राहकों को 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त बिजली की भी व्यवस्था की है. बीआरपीएल (बीएसईएस राजधानी पावर लि.) और बीवाईपीएल (बीएसईएस यमुना पावर लि.) में क्रमश: अधिकतम मांग 2,183 मेगावॉट और 1,095 मेगावॉट रही, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया.