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बाजार में गिरावट के बीच सरकारी बैंकों के स्टॉक्स में तेजी, क्या है शेयरों में बढ़त की वजह

Stocks of public sector banks rise amid market decline, what is the reason for the rise in shares

 
Stocks of public sector banks rise amid market decline, what is the reason for the rise in shares

Mhara Hariyana News:

शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिली है. निफ्टी पर एक सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स में गिरावट देखने को मिल रही है. आज के कारोबार में सिर्फ सरकारी बैंकों का इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है.ऑटो और रियल्टी सेक्टर में एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के मुकाबले सरकारी बैंकों के स्टॉक्स इंडेक्स 0.7 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिल रही है. जानकारों के मुताबिक सरकारी बैंकों के पटरी पर आने के संकेतों का स्टॉक्स को फायदा मिल रहा है वहीं सरकार के द्वारा सरकारी बैंकों के सीईओ के कार्यकाल की अवधि बढ़ाने से भी सेंटीमेट्स सुधर गए हैं. जिसके बाद खरीद देखने को मिली है.


कहां पहुंचे सरकारी बैंकों के स्टॉक्स
निफ्टी पीएसयू बैंक कारोबार के आखिरी घंटे में आधा प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था. इस दौरान इंडेक्स में शामिल 12 स्टॉक्स में से 9 बढ़त पर थे . वहीं 6 में बढ़त 3 प्रतिशत से भी अधिक थी. बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 7 प्रतिशत से ज्यादा, आईओबी में 4 प्रतिशत से ज्यादा, यूनियन बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में 3-3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त थी. पीएनबी 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था. दूसरी तरफ सबसे ज्यादा गिरावट बैंक ऑफ बड़ौदा में थी. स्टॉक करीब 1 प्रतिशत टूटा है. इंडियन बैंक और केनरा बैंक सीमित गिरावट के साथ और स्टेट बैंक सीमित बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था.

सीईओ के लिए अधिकतम कार्यकाल बढ़ा
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सीईओ तथा प्रबंध निदेशक (एमडी) के लिए अधिकतम कार्यकाल बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया है. इस कदम से सरकार को बैंकिंग क्षेत्र की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को लंबे समय तक साथ बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस खबर से सेक्टर के लिए सेंटीमेंट्स बेहतर हुए हैं. सरकार ने 17 नवंबर 2022 को अधिसूचना जारी की जिसमें बताया गया कि नियुक्ति की अवधि पहले के पांच वर्ष से बढ़ाकर अब दस वर्ष कर दी गई है.

पहले, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक या कार्यकारी निदेशक को अधिकतम पांच वर्ष या 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो भी पहले हो) का ही कार्यकाल मिलता था. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के पूर्णकालिक निदेशकों के लिए भी यही मापदंड होता था. सरकार के इस फैसले से बैंकों को ऐसी प्रतिभाओं को अपने साथ बनाए रखने में मदद मिलेगी जो 45-50 वर्ष की आयु में ही पूर्णकालिक निदेशक के पद पर पहुंच गए.