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पाकिस्तान में क्या है ‘Minus-one formula’, क्या इमरान होंगे इसके अगले शिकार?
पाकिस्तान में पीएम शरीफ पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए एक साक्षात्कार में इमरान खान ने कहा, "महज 85 सीटें हासिल करने वाला भगोड़ा कैसे नए सेना प्रमुख को नियुक्त कर सकता है."
 
पाकिस्तान में पीएम शरीफ पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए एक साक्षात्कार में इमरान खान ने कहा, "महज 85 सीटें हासिल करने वाला भगोड़ा कैसे नए सेना प्रमुख को नियुक्त कर सकता है."

Mhara Hariyana News: 

पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल लगातार बनी हुई है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ हमलावर बने हुए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने “माइनस-वन फॉर्मूला” के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. यह शब्द पाकिस्तान में बेहद चर्चित शब्द है और इसका इस्तेमाल देश में व्यापक रूप से “प्रतिष्ठान” के जरिए किसी राजनीतिक दल के नेता के खिलाफ किया जाता है और किसी दूसरे नेता को सत्ता देकर सरकार का गठन कर दिया जाता है.


पीटीआई की ओर से ऐसा दावा किया गया है कि इमरान खान को भविष्य के किसी भी चुनाव से अयोग्य ठहराने के लिए फॉर्मूले के इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है. पाकिस्तान में जब भी राजनीतिक उथल-पुथल का दौर अपने चरम पर पहुंचता है तो इस शब्द की व्यापक रूप से चर्चा शुरू हो जाती है और इसका उपयोग किया जाता है. साथ ही यह भी माना जाता है कि इसका इस्तेमाल खासतौर पर सेना की ओर से किया जाता है.

क्या है माइनस फॉर्मूला
संक्षेप में कहा जाए तो यह एक राजनीतिक दल को उसके अपने ही नेता के विरुद्ध करने की कोशिश है.

पाकिस्तान में कई ऐसे असैन्य नेता जब वे ज्यादा बड़े हो गए तो उन्हें संदिग्ध तरीकों से दरकिनार कर दिया गया या फिर उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया गया. कई प्रधानमंत्री और राष्ट्रपतियों के साथ ही ढेरों अन्य नेताओं के बारे में माना गया कि उन्होंने रेड लाइन को क्रॉस किया और ऐसा करने की कोशिश करने पर उन्होंने भी खुद को ‘माइनस-वन’ का शिकार होना बताया.

अब यही अफवाह इन दिनों पाकिस्तान में फिर से तेज होती जा रही है कि ‘माइनस-वन’ फॉमूला अब इमरान खान पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हाल के दिनों में राज्यों के साथ उनके रिश्ते थोड़े खराब हुए हैं.

बेनजीर भुट्टो पर हो चुका इस्तेमाल!
पाकिस्तान में इस फॉर्मूले का खुलकर और जमकर इस्तेमाल किया गया और चुने हुए नेताओं को सेना की पकड़ से बाहर जाने की स्थिति में ‘माइनस-वन’ के जरिए हटाया गया. माना जाता है कि इस फॉर्मूला का पहली बार इस्तेमाल बेनजीर भुट्टो के साथ किया गया. भुट्टो के उनके पहले प्रधानमंत्रीत्व काल (1988-90) में इस ‘माइनस-वन’ का इस्तेमाल किया गया. हालांकि यह आइडिया 1947 से ही पाकिस्तान में रहा है.

दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने जल्द चुनाव कराए जाने की अपनी मांग को दोहराते हुए सोमवार को कहा कि सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को नई सरकार के चुने जाने तक सेवा विस्तार दिया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नवंबर के अंत तक मौजूदा जनरल बाजवा की सेवानिवृत्ति से पहले नए सेना प्रमुख को चुनने के लिए तैयार हैं.

चहेते को चुनना चाहते हैं शरीफः इमरान
पीएम शरीफ पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए दुनिया न्यूज चैनल को दिए एक साक्षात्कार में इमरान खान ने कहा, “महज 85 सीटें हासिल करने वाला भगोड़ा कैसे नए सेना प्रमुख को नियुक्त कर सकता है.” पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद में रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए इमरान ने आरोप लगाया कि सरकार निष्पक्ष चुनाव से डरती है और नए सेना प्रमुख की नियुक्ति तक चुनाव में देर कर रही है. आसिफ अली) जरदारी और नवाज (शरीफ) अपने चहेते को अगले सेना प्रमुख के रूप में लाना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने जनता का पैसा चुराया है.

उन्होंने कहा, “उन्हें (जरदारी व शरीफ को) डर है कि जब देशभक्त सेना प्रमुख आएंगे तो वह उनसे उनकी लूट के बारे में पूछेंगे.”

हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इमरान के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई. सेना ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तानी सेना फैसलाबाद में एक राजनीतिक रैली के दौरान पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष द्वारा पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के बारे में अपमानजनक और गैरजरूरी बयान से व्यथित है.”