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आठ वर्षों में औंधे मुंह गिरी सीएम विंडो प्रणाली!
सीएम विंडो की शिकायतों की होती है अनसुनी
 
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Mhara Hariyana News
सिरसा।

आगामी 25 दिसंबर 2022 को प्रदेश में सीएम विंडो प्रणाली लागू हुए आठ साल पूरे हो जाएंगे। प्रदेश की मनोहर सरकार ने वर्ष 2014 में आमजन की समस्या का निदान करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिन पर इसे लागू किया था। शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए लागू की गई सीएम विंडो सिरसा में औंधे मुंह गिर चुकी है। सीएम विंडो की शायद ही किसी विभाग को परवाह हों। लोग भी निराश और हताश हो चुके है, इसलिए अपनी व्यथा और पीड़ा व्यक्त करने के लिए कभी सीएम दरबार और कभी गृहमंत्री के जनता दरबार का रूख करते है। 


    जिस लक्ष्य से सीएम विंडो शुरू की गई थी, यदि इसे दृड़ता से लागू किया जाता, अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती, तब पब्लिक को घर बैठे इससे बेहतर सेवा कोई दूसरी न मिलती। मगर, प्रशासनिक स्तर पर इस योजना को ढंग से लागू ही नहीं किया गया। जिसके कारण सीएम विंडो की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। बताया जाता है कि अकेले सिरसा जिला में 2000 से अधिक सीएम विंडो पेंडिंग है। अचरज की बात तो यह है कि जिनका समाधान का दावा किया गया है, उनमें भी अनेक में खानापूर्ति की गुंजाइश है।
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- पेंडिंग सीएम विंडो मामले में नप अव्वल
सिरसा। सीएम विंडो की शिकायतों के न निपटाने के मामले में सिरसा नगर परिषद का अव्वल नंबर है। बताया जाता है कि अधिकांश शिकायतें नगर परिषद से ही संबंधित है, जिनकी कोई सुनवाई नहीं की जाती और न ही विभागीय अधिकारी इसके बारे में गंभीर है। इसके बाद सिरसा में लेबर विभाग आता है, जिसकी कारगुजारी को लेकर मजदूरों द्वारा शिकायतें दाखिल की गई है। इसके बाद पुलिस विभाग का नंबर आता है और फिर बारी-बारी से अन्य विभाग इस सूची में अपना स्थान बनाए हुए है।

-सरकार के मंसूबों पर फेर रहे पानी!
सिरसा। मनोहर सरकार ने वर्ष 2014 में प्रदेश की सत्ता संभालते ही आमजन को ऐसा प्लेटफार्म दिया ताकि आमजन अपने ही गृह जिला में शिकायत दाखिल करवा सकें, उसे शिकायत के लिए चंडीगढ़ का सफर तय न करना पड़े। इसके लिए कम्प्यूटरीकृत प्रणाली अपनाई गई। शिकायतकत्र्ता को बकायदा शिकायत नंबर दिया गया, पोर्टल पर शिकायत का वह स्टेट्स जांच सकता है। सरकार की ओर से पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को संबंधित अधिकारी के पास भेजा जाता है। शिकायत की लगातार मॉनिटरिंग होती है। उच्चाधिकारियों की ओर से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी जाती है, एटीआर मांगी जाती है। 


    सीएम विंडो को पारदर्शी व जवाबदेह बनाने के लिए जिला में नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई। हर सप्ताह सीएम विंडो को लेकर बैठक के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को चेतावनी दी जाती है, लेकिन आज सीएम विंडो का हश्र यह है कि लोगों का सीएम विंडो पर विश्वास घट गया है। वे शिकायत के लिए अन्य प्लेटफार्म तलाशने लगे है।

- बंदिशें इधर भी-उधर भी
सिरसा। सीएम विंडो के मामलों के फर्जी निपटान को रोकने के लिए सरकार की ओर से कॉल सेंटर स्थापित कर पब्लिक का फीडबैक लेना शुरू किया। जिन शिकायतों में शिकायतकत्र्ता का संतुष्ट होना दर्शाया गया, उन्हें कॉल सेंटर से इस बाबत पूछा जाता है कि क्या वे संतुष्ट है? फर्जी निपटान को लेकर ही सरकार ने एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) प्रणाली लागू की, जिस पर शिकायतकत्र्ता के हस्ताक्षर करवाने अनिवार्य किए गए और इसे पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया। इसके साथ ही सरकार ने हर जिला में एमिनेंट पर्सन की नियुक्ति की ताकि आमजन की शिकायत का हकीकत में निपटान हो सकें।

इसके साथ ही सरकार ने फर्जी शिकायतों को रोकने के लिए शिकायत दाखिल करने के लिए आधार कार्ड और मोबाइल नंबर की अनिवार्यता की ताकि कोई दूसरे के नाम से फर्जी शिकायत न कर सकें। दरअसल, अनेक मामलों में दूसरे के नाम से शिकायत की गई, जब पड़ताल की गई तो शिकायतकत्र्ता ने शिकायत बारे अनभिज्ञता प्रकट की। ऐसे में शिकायतकत्र्ता की भी जवाबदेही तय हुई।

- सिरसा में ऐसे निपटाई जाती है शिकायतें
सिरसा। सीएम विंडो की शिकायतों को सिरसा में कैसे निपटा दिया जाता है, इसकी बानगी गली निर्माण में धांधली की शिकायतकत्र्ता के कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर के रूप में सामने आई। पंचायत के खिलाफ आई शिकायत मामले में फर्जी हस्ताक्षर कर डाले गए, पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। सीएम विंडो के मखौल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन मामलों में एमिनेंट पर्सन की रिपोर्ट खिलाफ होती है, उस एटीआर को पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया जाता।

नगर परिषद सिरसा के एक मामले में एक एमिनेंट पर्सन ने जांच के बाद धांधली की शिकायत  को उचित पाया और सरकार ने इसकी उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा की। परिषद के अधिकारियों ने उक्त एमिनेंटपर्सन की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने की बजाए फाइल से इसे निकाल कर दूसरे एमिनेंट पर्सन से नई रिपोर्ट अपने पक्ष में बनवाकर शिकायत को फाइल कर दिया?
 

- देरी के लिए जवाबदेही तय नहीं!
सिरसा। सीएम विंडो कैसे कारगर होगी, जब तक पब्लिक की शिकायतों के निपटान को लेकर जवाबदेही तय नहीं होगी। सीएम विंडो की शिकायतों के निपटान के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं होगी। सिरसा में सीएम विंडो का कब निपटान होगा, कोई नहीं जानता? न किसी को इसकी फ्रिक है। पब्लिक साल-दो साल, चार साल तक इंतजार ही करती रहती है। सिरसा के विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें लंबे अरसे से निपटान का इंतजार कर रही है।