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वार्ड बंदी व मतदाता सूचियों में की गई छेड़छाड़ को लेकर सौंपा ज्ञापन

 
Memorandum submitted regarding ward closure and tampering in voter lists

Mhara Hariyana News, Sirsa
सिरसा। अनुसूचित एवम् पिछड़ी जाति संघर्ष समिति सिरसा, हरियाणा की ओर से वीरवार को एडीसी विवेक भारती से मिलकर मख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। अतिरिक्त उपायुक्त विवेक भारती से मिलने आए सतबीर सिंह पूनिया, मांगेराम मांडिया, रविंद्र बालियान, हरि सिंह, साधुराम, अनिल चंदेल, नगर पार्षद विकास गुर्जर, नगर पार्षद विकास जैन, पार्षद प्रतिनिधि अमित सोनी, भाल सिंह, राजकुमार चंदा, रामकृष्ण, कैलाश कानूनगो, हनुमान पटीर ने बताया कि सिरसा नगर परिषद में गलत वार्डबंदी कर मतदाता सूचियों से अनुसूचित जाति एवम् पिछड़ी जातियों के लोगों के मत एक साजिश के तहत हटाए गए हैं। सिरसा जिला हरियाणा राज्य का एक महत्वपूर्ण जिला है। यहां कि नगर परिषद के चुनाव काफी लम्बे से करवाए नहीं जा रहे हैं। निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के अभाव में शहर के कुछ अवांछित प्रभावशाली लोगों व नगर परिषद के अधिकारियों के कारण नगर परिषद का कार्य बहुत ही बदहाल स्थिति में पंहुच गया है। काफी समय पहले दो बार चुनाव आयोग द्वारा नगर परिषदों के चेयरमैन पदों में अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग व महिलाओं का प्रतिनिधित्व तय करने के लिए ड्रा निकाल कर यह निर्धारित कर चूके हैं कि किसी नगर परिषद का चेयरमैन/चेयरपर्सन किस वर्ग का होगा। अभी हाल ही में जानकारी में आया है कि कुछ षडय़ंत्र रच कर सिरसा नगर परिषद की मतदाता सूचियों में धांधली करके अनुसूचित जातियों व पिछड़ी जातियों के लोगों के क्रमश: 15000 व 12000 मतों को कम दिखाया गया है। या तो इन मतों का बिल्कुल ही मतदाता सूचियों से हटा दिया गया है या फिर इनका मत कहीं दूसरे स्थानों पर स्थानान्तरण कर दिया गया है। इससे इन वर्गों के मताधिकार छीनने का काम किया है, जोकि इन वर्गों से इनका मूलभूत सैंवेधानिक अधिकार छीनने का षडय़ंत्र है। इससे अनुसूचित जाति व पिछड़ी जातियों में बहुत आक्रोश है। शहर के लोगों से पता चला है कि एक वर्ष पूर्व किए गए सर्वे में शहर की कुल जनसंख्या 220219 थी, जिसमें 56840 अनुसूचित जाति व 55030 पिछड़ी जातियों की जनसंख्या थी । वहीं अब वर्तमान में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 41302 व पिछड़ी जातियों की जनसंख्या 38074 बताई गई है, इसका आधार मान कर कुल जनसंख्या 212909 दिखाई गई है, जबकि वर्तमान में आसपास लगते आठ गांवों को भी इस सर्वे में शामिल किया गया है। अब प्रश्न पैदा होता है कि जहां कुल जनसंख्या में मामूली कमी की गई है, वहीं अनुसूचित जातियों व पिछड़ी जातियों की जनसंख्या में बहुत अधिक कमी दिखाई गई है। यह एक बहुत बड़ा षडय़ंत्र किया गया है। इन तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए नगर परिषद की वेवसाईट से ली गई सूचियों की प्रतियां साथ सलंग्न की जा रही है। आप से निवेदन है कि इन उपरोक्त अति गम्भीर व संवेदनशील मामले में स्वंय व्यक्तिगत तौर पर संज्ञान लेकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवा कर मतादाता सूचियों और वार्डबंदियों को सही करवाया जाए, ताकि संविधान के मौलिक अधिकारों के अन्तर्गत प्रत्येक मतादाता को उसके मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार मिल सके।