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यूजीसी पीएचडी दाखिला अधिनियम-2022 तुरंत प्रभाव से लागू करे सीडीएलयू: डा. रेखा रानी

 
यूजीसी पीएचडी दाखिला अधिनियम-2022 तुरंत प्रभाव से लागू करे सीडीएलयू: डा. रेखा रानी
सिरसा। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय में सिरसा जिले की लड़कियों ने भाई-भतीजावाद (आपसी सहमति) आधारित पीएचडी दाखिला प्रकिया बंद कर मैरिट आधारित दाखिला प्रक्रिया अपनाने और यूजीसी पीएचडी दाखिला अधिनियम-2022 तुरंत प्रभाव से लागू करने बारे चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा. राजेश कुमार बंसल के माध्यम से कुलपति डा. अज़मेर सिंह मलिक के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने तुरंत प्रभाव से ज्ञापन में लिखी मांगों के समाधान की गुजारिश की। डा. रेखा रानी ने बताया कि इस मांग को लेकर लगभग 3 से 4 महीने पहले विश्वविद्यालय के कुलपति से मिल कर ज्ञापन सौंप चुके हैं, परन्तु अभी तक किसी प्रकार की कोई सकारात्मक कार्यवाही नजर नहीं आयी है। 
एक तरफ  सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देती है और दूसरी तरफ  उच्च शिक्षण संस्थानों का ऐसा रुख बेटियों की शिक्षा में सहायक ऐसे नियमों को लागू ना कर उनके उच्च शिक्षा प्राप्त करने में रोड़े अटकाने का काम करने के साथ-साथ उनको पीएचडी करने से रोक रही है। ज्ञापन में डा. रेखा रानी व सिरसा जिले की अन्य छात्राओं ने बताया कि यदि इस दाखिला प्रकिया पर तुरंत प्रभाव से रोक नहीं लगाई गई तो विरोध प्रदर्शन होगा, उसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। 
यह नियम आसपास के प्रदेशों के विश्वविद्यालयों में पूरी तरह से लागू हो चुका है और हरियाणा की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक इसे पूरी तरह से अपना चुकी है। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय आपसी सहमति दाखिला प्रकिया के चलते मैरिट को दरकिनार कर आपसी जानकारी से सहमति से दाखिला कर लिया जाता है और योग्य छात्राएं पीएचडी दाखिले से वंचित रह जाती हैं।
ये होंगे फायदे:
उन्होंने बताया कि अगर विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी पीएचडी दाखिला नियम-2022 अपनाया जाता है तो योग्य होते हुए भी उच्च शिक्षा (पीएचडी) के लिए सिरसा आस पास की बेटियों को दूर-दराज के प्रदेशों/शहरों में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। विश्वविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा, जिसके चलते नैक की ग्रेड में सुधार होगा और एनआईआरएफ रैंक में भी उच्च स्थान हासिल होगा और छात्रों की प्लेसमेंट अच्छी और ज्यादा संख्या में होगी। यूजीसी दिल्ली व देश की अन्य संस्थानों द्वारा ग्रांट मिलने की संभावना बढ़ जायेगी। विश्वविद्यालय में वित्तीय आमदनी बढ़ेगी।