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कुष्ठ रोग का मल्टी ड्रग थैरेपी द्वारा इलाज संभव : ढींडसा

जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय में समाज में कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतियोगिताओं  का आयोजन 
 
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सिरसा 31 जनवरी , 2024 : जेसीडी विद्यापीठ में स्थित जेसीडी शिक्षण महाविद्यालय में समाज में कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं जैसे स्लोगन लेखन प्रतियोगिता, चार्ट मेकिंग  व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।  जिसमें मुख्य अतिथि जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ कुलदीप सिंह ढींडसा थे तथा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जयप्रकाश द्वारा अध्यक्षता की गई। सर्वप्रथम प्राचार्य ने मुख्य अतिथि अभिनंदन हरा पौधा भेंट कर किया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश ने बताया  कि पहला विश्व कुष्ठ रोग दिवस 1954 में फ्रांसीसी पत्रकार राउल फोलेरो द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने यह दिन महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए चुना, जिन्होंने कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति दया और सहानुभूति दिखाई थी।

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  मुख्य अतिथि डॉक्टर ढींडसा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुष्ठ रोग हाथ-पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। कुष्ठ रोग मुख्य रूप से त्वचा और दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के बाहर की नसों को प्रभावित करता है। कुष्ठ रोग में विशिष्ट चकत्ते और धक्कों का विकास होता है। उनमें खुजली नहीं होती है। नसों के संक्रमण में संक्रमित नसों द्वारा नियंत्रित क्षेत्रों में त्वचा सुन्न हो जाती है या मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार शीघ्र न हो तो यह स्थाई विकलांगता का कारण बन जाता है। किसी भी कुष्ठ रोगी से भेदभाव नही करना चाहिए। समाज के लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक होना चाहिए। भारत सरकार कुष्ठ रोग को मिटाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने  कहा कि अगर समाज के किसी व्यक्ति को कुष्ठ रोगी दिखाई दे तो उसका कर्तव्य है कि वह उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए न केवल प्रेरित करे बल्कि पीड़ित की हर संभव मदद करें।

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  डॉक्टर ढींडसा ने कहा कि कुष्ठ रोग मल्टी ड्रग थेरेपी से पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है। एक समय में कई एंटीबायोटिक्स लेना मल्टीपल ड्रग थेरेपी कहलाता है। इसमें अधिकांश दवाएँ गोलियों के रूप में दी जाती हैं। कुष्ठ रोग का पूर्ण उपचार संभव है। इसमें मरीज को घबराने की जरूरत नहीं है। समय पर उपचार लेने से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।  कुष्ठ भी दो तरह के होते हैं, जिनके इलाज का कोर्स भी अलग-अलग मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीआर) से किया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने शपथ दिलाई कि कुष्ठ रोगियों के साथ कोई भेदभाव नहीं किए जाने का समाज को संदेश दें। इस मौके पर हाथ मिलाएं, कुष्ठ मिटाएं के माध्यम से समाज को कुष्ठ मुक्त करने का संकल्प लिया गया। 

   निर्णायक मंडल द्वारा घोषित परिणामों में स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान माया बी.एड. स्पेशल प्रथम वर्ष,  द्वितीय स्थान हर्षिका बी.एड. स्पेशल प्रथम वर्ष ने प्राप्त किया। चार्ट मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बीएड स्पेशल प्रथम वर्ष की छात्रा कविता और द्वितीय स्थान बी.एड. स्पेशल द्वितीय वर्ष के छात्र प्रमोद ने प्राप्त किया। इसी तरह भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान नीतू रानी बी.एड. स्पेशल प्रथम वर्ष तथा द्वितीय स्थान रवि कुमार बी.एड. स्पेशल द्वितीय वर्ष ने प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता बी.एड.स्पेशल के प्रवक्ता मदनलाल के नेतृत्व में करवाई गई तथा स्लोगन लेखन प्रतियोगिता प्रवक्ता अनुराधा और चार्ट मेकिंग प्रतियोगिता प्रवक्ता राजपवन के नेतृत्व में करवाई गई । कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को मुख्य अतिथि और प्राचार्य द्वारा प्रमाणपत्र दिए गए। मुकेश जी को स्मृति चना देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉक्टर राजेंद्र कुमार, डॉक्टर रमेश कुमार, डॉक्टर सतनारायण ,डॉक्टर सुषमा हुड्डा, बलविंद्र, प्रीति के इलावा समूचा स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।