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किसानों के आंदोलन को रोकना सरकार की बौखलाहट का परिचायक: डा. सुशील इंदौरा

 
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सिरसा। पूर्व सांसद डा. सुशील इंदौरा ने किसानों के दिल्ली कूच को समर्थन देते हुए कहा कि देश का किसान अपने हकों के लिए आवाज उठा रहा है, लेकिन तानाशाही सरकार अन्नदाता को अपनी आवाज उठाने के लिए दिल्ली आने से रोकना चाहती है, जोकि सरकार की किसानों के प्रति दोहरी मानसिकता को साफ दर्शा रहा है।

डा. इंदौरा ने कहा कि इतना ही नहीं किसान नेताओं को तरह-तरह से धमकियां दी जा रही है, गांवों में मुनियादी करवाई जा रही है। सरपंचों को भी बकायदा हिदायतें दी गई है कि वो अपने गांवों के किसानों को समझाएं, ताकि वो आंदोलन का हिस्सा न बने। ये सब कुछ सरकार की बौखलाहट का परिचायक है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार का दोहरा चेहरा जनता के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दुगुनी करने का वादा किया था, लेकिन 10 साल में किसानों की आय तो दुगुनी नहीं कर पाए, लेकिन किसानों के कर्ज को जरूर दुगुना कर दिया। यहां तक की प्रधानमंत्री ने काले कानूनों को निरस्त करते समय भी एमएसपी का कानून बनाने का किसानों से वादा किया था, लेकिन संसद में आज तक भी एमएसपी का जिक्र तक नहीं हुआ है।

केंद्रीय बजट में भी एमएसपी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया। इससे सरकार की करनी व कथनी में फर्क को वाकई जनता महसूस कर रही है। डा. इंदौरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन का समर्थन करती है। लोकतंत्र में सभी को प्रदर्शन करने का अधिकार है। किसानों को बिना किसी डर के अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का हक है। सरकार की किसानों के प्रति ज्यादती सहन नहीं की जाएगी।