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जब सुषमा के सिर ढकने पर स्वरूपानंद ने खड़े किए थे सवाल, इंदिरा को याद कर की थी आलोचना

शंकराचार्य के सवाल उठाने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी विदेश मंत्री के सिर ढकने की खबर की खूब चर्चा हुई थी. राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने सिर को एक स्टॉल से ढक लिया था.
 
शंकराचार्य के सवाल उठाने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी विदेश मंत्री के सिर ढकने की खबर की खूब चर्चा हुई थी. राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने सिर को एक स्टॉल से ढक लिया था.
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Mhara Hariyana News: 

द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का 99 साल की उम्र में निधन हो गया है. स्वरूपानंद सरस्वती अपने कई बयानों के लिए काफी चर्चा में रहे. साल 2016 में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के ईरान दौरे के दौरान उनके पहनावे की उन्होंने खूब आलोचना की थी. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पहवाने को उन्होंने भारतीय संस्कृति को धक्का करार दिया था.


दरअसल जब सुषमा स्वराज ईरान पहुंची थीं तो तत्कालीन राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात के दौरान उन्होंने साड़ी पहनी थी, साथ ही अपने सिर को एक स्टॉल से ढक लिया था. ये बात शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को नागवार गुजरी. उन्होंने कहा था कि सुषमा स्वराज के इस तरह के पहनावे को चुनना देश के सम्मान के लिए एक धक्का है.

सुषमा स्वराज के पहवाने की आलोचना
शंकराचार्य के सवाल उठाने के साथ ही सोशल मीडिया पर भी विदेश मंत्री के स्टॉल से सिर ढकने की खबर की खूब चर्चा हुई थी. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति का मजाक बताया था. शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा था कि सुषमा स्वराज ने अपनी पोषाक चुनते समय ईरान की संवेदनाओं का तो ध्यान रखा लेकिन बारतीय परंपरा की अनदेखी की. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री के पोषाक के चयन से विदेश में भारतीय संस्कृति को ठेस पहुंचाई गई.

‘इंदिरा गांधी ने हमेशा पहवाने में भारतीयता दिखाई’
उन्होंने सुषमा स्वराज की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से करते हुए कहा था कि जब वह विदेश गईं थीं तो उन्होंने भारतीय संस्कृति को बरकरार रखा था. स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इंदिरा गांधी ने हमेशा इस बात पर ध्यान दिया कि उनके पहनावे में भारतीयता दिखती रहे. ये कोई पहला बयान नहीं था जो स्वरूपानंद सरस्वती ने दिया था. वह इससे पहले शनि शिगणापुर में महिलाओं के प्रवेश पर भी आपत्ति जता चुके थे.


बयानों से सुर्खियों में रहे स्वरूपानंद सरस्वती
ज्योतिष और द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकराचार्य सरस्वती का आज 99 साल की उम्र में निधन हो गया, उन्होंने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में आखिरी सांस ली. लंबे समय से वह बीमार थे. उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था, उस दौरान वह जेल भी गए थे. राम मंदिर निर्माण के लिए भी उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी. वह अपने बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते थे.