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ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर के मंच से हुआ ‘सर्व धर्म एकता’ का उद्घोष

महामंडलेश्वर साध्वी ऋतम्भरा जी सहित अनेकों सम्प्रदाय के धार्मिक प्रमुख हुए शामिल
 
ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर के मंच से हुआ ‘सर्व धर्म एकता’ का उद्घोष
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ब्रह्माकुमारीज़ सिरसा द्वारा 5 जनवरी को आनन्द सरोवर परिसर में ‘सनातन संस्कृति की बुनियाद आध्यात्मिकता’ विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें हरियाणा, राजस्थान, पंजाब के विभिन्न सन्तों, कई धार्मिक सम्प्रदायों के प्रमुख, 105 मन्दिरों के पुजारी, 15 गउशालाओं के प्रधान, 35 शास्त्री, 25 ज्योतिषाचार्य, नाथ
सम्प्रदाय के अनेकों नाथ, राधा स्वामी सम्प्रदाय, ब्राह्मण समाज तथा धार्मिक संस्थानों के प्रधान, सचिव सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की जिनका ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची महामण्डलेश्वर साध्वी ऋतम्भरा जी झज्जर, ने कहा कि पूरे विश्व में सुख-शांति के लिए प्रार्थना करना और एक ईश्वर की सन्तान के नाते से वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ सबके साथ व्यवहार में आना सनातन संस्कृति का मुख्य सन्देश है जिसका हमें अनुसरण करना चाहिए, उन्होंने सभा को आध्यात्म का सुन्दर संगम बताते हुए कहा कि जब हम जाति पाति। 

Mahamandaleshwar Sadhvi Ritambhara

मेरा के भाव से उपर उठ आपसी एकता, समभाव और समान दृष्टिकोण से विचरण करेंगे तो संसार से हर प्रकार की शारीरिक और मानसिक व्याधियां समाप्त हो जायेंगी और मानव धर्म को बल मिलेगा। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के साथ मिलकर एक ही मंच से मानव कल्याण के कार्यों को करने की इच्छा प्रकट की और अपने अनुभवों को संाझा करते हुए कहा कि इस ईश्वरीय परिवार में आकर मैंने जो निश्छल प्रेम, पवित्र वाइब्रेशन और अपने अलौकिक स्वरूप का दिव्य अनुभव किया है वो अविस्मरणीय है। सम्मेलन के मुख्य वक्ता, माउंट से पधारे संस्था के धार्मिक प्रभाग के मुख्यालय संयोजक राजयोगी बी. के. रामनाथ जी ने कहा कि सनातन संस्कृति शाश्वत है जो सृष्टि के आदि काल से मनुष्य को जागृत और सशक्त करती आ रही है। उन्होंने रामायण तथा महाभारत में वर्णित दृष्टातों के सार में कहा कि श्री गीता जी भगवान की श्रीमत है और सनातन संस्कृति की मूल धरोहर है, इसमें वर्णित अर्जुन श्रीकृष्ण सवांद पवित्र गृहस्थ आश्रम एवं सनातनी जीवनशैली का सन्देश है जिसका अनुसरण व्यक्ति को देवत्व की ओर ले जाता है, इसलिए जीवन को दिव्य और पवित्र बनाने के लिए अपने परमपिता परमात्मा शिव से जुड़ कर सर्वशक्तियों को धारण करते हुए अपने संस्कारों को परिवर्तन करें ताकि सनातन धर्म सशक्त हो सके । सभा में उपस्थित मन्दिरों के पुजारियों का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि पुजारी से ही मन्दिर की शोभा होती है इसलिए पुजारी होना गर्व की बात है। 

सभा में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए विश्व हिन्दू परिषद, हिसार के विभागाध्यक्ष भ्राता बृजमोहन शर्मा जी नें सन्तों, तपस्वियों के मध्य उपस्थिति को अपना सौभाग्य बताया और कहा कि ऐसी महान विभूतियों के सानिध्य में बैठकर की हमारा वैचारिक दृष्टिकोण बदलता है।


कार्यक्रम अध्यक्षा राजयोगिनी बिन्दू दीदी जी नें कहा कि सनातन संस्कृति की मूल प्रेरणा पवित्रता अर्थात ब्रह्मचर्य है जिससे ही हमारे जीवन में आध्यात्मिक शक्ति का उदगम होता है और साधारण मनुष्य देवतुल्य हो जाता है, आज समय की मांग यही है कि अब भोग विलासता वाले जीवन से मुक्त होकर पवित्र एवं महान व्यक्तित्व की ओर कदम बढ़ाया जाए क्योंकि भोग विलासता के कारण आज मनुष्य की मानसिक और शारीरिक शक्तियां नष्ट होती जा रही है जिसके परिणामस्वरूप समाज में मानसिक प्रदूषण अपनी चरम सीमा पर है, इसलिए अब हर व्यक्ति अपनी मौलिक जिम्मेवारी को समझे और पवित्रता की प्रतिज्ञा करे ताकि भारत भूमि पर दैवी दुनिया का सूर्योदय हो सके।
 

सम्मेलन में उपस्थित तरावड़ी के आदरणीय श्री सतेन्द्र गिरी जी महाराज ने अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीराम मन्दिर में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा की सबको बधाई दी और बड़ी गर्मजोशी से इस दिन दीपक जगाकर दीवाली मनाने के लिए सभा को प्रेरित भी किया। कार्यक्रम में माखोसरानी के नन्नू नाथ जी, ब्रह्मानन्द जी महाराज -गोपाल पूरी सन्यास आश्रम, श्री कृष्ण लाल जी - प्रधान राधा स्वामी डेरा रूपावास, बाल ब्रह्मचारी बाबा जनक दास जी मीरपुर, बाबा हंसराज जी टिब्बी, श्री लक्ष्मण नाथ जी खारिया, आचार्य द्रोण जी, श्री हरिकिशन गोयल जी- अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद, श्री गौरव शर्मा जी- जिला मंत्री विश्व हिन्दू परिषद, श्री रितेश जोशी जी- महासचिव श्री ब्रह्मण सभा, श्री सन्यनारायण जी महाराज- शकर मंदोरी, श्री बसन्तनाथ कल्याणी जी- बाबा हरिनाथ अखाड़ा माखोसरानी सहित सैकड़ों गणमान्य हस्तियों ने अपरी उपस्थिति दर्ज की। बी. के. रामनिवास जी के कुशल मंच संचालन, बी के रानी दीदी जी द्वारा मेडिटेशन अभ्यास, बाल कलाकारों के सांस्कृतिक नृत्य तथा आध्यात्मिक गीतों की सरगम ने समारोह की शोभा को और बढ़ाया।